Monday, 26 January 2015



 हेलो दोस्तों में इस ब्लॉग में आपके साथ एक मरीज़ की कहानी को साँझा कर रहा हूँ. जिसमे मरीज़ की समस्याओं को और उसकी पीडा को अनुभव किया जा सकता है साथ ही मरीज़ के लिए कुछ सम्भावित उपाय खोजे जा सकते हैं.

 

मरीज़ की कहानी स्वयं उसकी के अनुसार :

 

समस्या: ठीक तरह से ना चल पाना एवं उल्टी आँख से ना देख पाना X 3 सालों से यह समस्या है.

मरीज के अनुसार : मरीज एक इंजीनियर है. मरीज का बचपन बहुत अच्छा था. मरीज के ६ भाई थे. स्कूल समय भी अच्छा बिता हालंकि ये एक एवरेज स्टूडेंट थे पर कॉलेज में काफी होशियार स्टूडेंट में शामिल रहे थे दोस्ती यारी मज़ाक साथ ही स्टडी भी करते थे. घर में चौथे नम्बर के लड़के होने के कारण किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा था. कॉलेज पूरा करने के बाद इनकी जॉब साल 1990 में मोटर साइकिल के शो रूम में लग गई एक छोटी सी पोस्ट से अपने जॉब की शुरुआत की पर काम में अपना 100% देने और दिलो-जान लगाकर काम करने का फल भी इन्हे मिला और अपने 16 साल के जॉब के सफर में 4 प्रमोशन हासिल किये. और बाइक पार्ट्स बनाने वाले डिपार्टमेंट में ऊँची पोस्ट पर रहे थे. इसी बीच इनकी शादी हो गई शादी के बाद अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए अपने संयुक्त परिवार से अलग हो गए और अपनी पहचान बनाने में जूट गए इसके लिए इन्होने पूरी दिल से अपनी जॉब को किया पर साल 2006 में ना चाहते हुए भी अपनी जॉब को छोड़ना पड़ा था. ये साल इनके लिए काफी तकलीफ लेकर आया था.
आज से 8 साल पहले वर्ष 2006 में सर्दियों की एक रात जब मरीज़ अपने वाहन से घूमने जा रहा था तब करीब रात के बजे का समय रहा होगा जब अचानक से इनके सामने एक मोटर साइकल गई और यह अपना संतुलन नही संभल पाए और एक घम्भीर एक्ससीडेंट के शिकार हो गए. टक्कर इतनी भयानक थी की मौके पर ही मरीज़ बेहोश हो गया और उसके उलटी आँख के पास और सर पर चोट लग गई जिससे रक्त निकलने लगा. परन्तु इनकी पत्नी को किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई थी. मरीज़ की पत्नी ने जब मरीज़ को ऐसी हालत में देखा तो रोते हुए सड़क पर जा रहे लोगो से मदद मांगने लगी. काफी प्रयास के बाद युवकों ने उनकी मदद की और मरीज़ को अस्पताल तक पहुँचाया. जिस मोटर साइकल से इनकी टक्कर हुई थी वो तुरत ही स्पॉट से भाग गया था. मरीज़ को बेहोशी की हालत में ही अस्पताल लाया गया था तब डाक्टरों ने हालत गंभीर देख कर मरीज़ को ICU में भर्ती कर लिया और तुरंत ही घाव वाले स्थान पर टांके लगाये उसी समय मरीज़ को 2 से 3 बार उल्टियाँ भी हुई उल्टियों में पानी पानी सा था साथ ही लाल लाल रंग की थी. उल्टियों के समय भी मरीज़ बेहोशी में था. कुछ ही समय बाद मरीज़ को फेड्स आने लगे तब डाक्टरों ने कुछ इंजेक्शन और दवाई दी जिससे थोड़ा आराम हुआ, आराम मिलते ही मरीज़ को MRI की जांच के लिए भेज दिया गया. मरीज़ को अगले दिन सुबह होश आया था. एम आर आई की रिपोर्ट सुबह मिली तब डॉक्टर ने रिपोर्ट देख कर बताया की मरीज़ की ऑप्टिकल नर्व में समस्या हो गई है. साथ ही मरीज़ को उल्टी आँख से कुछ नहीं दिखाई दे रहा था तो यह समस्या का कारण भी डाक्टरों ने ऑप्टिकल नर्व में हुई डेमेज ही बताया था. साथ ही मरीज़ को होश आने के साथ ही नाक से पानी बहाने की समस्या दिखाई देने लगी तब डाक्टरों ने बताया की मरीज़ के दिमाग में भी चोट आई है इसी वजह से ये समस्या भी हो रही है इस समस्या के लिए डाक्टरों ने 14 दिनों की दवाई लिख दी और डिस्चार्ज कर दिया. 13 दिनों में मरीज़ को नाक से पानी बहाने वाली समस्या में आराम लग गया पर उल्टी आँख से ना दिख पाने वाली समस्या के लिए कई डाक्टरों को दिखाया पर आराम नही मिला. आज भी आँख वाली समस्या पहले जैसी ही है आँख से ना के बराबर दिखाई देता है. सभी डाक्टरों ने कहा की ऑप्टिकल नर्व में चोट लगने पर सुधार होना बहुत मुश्किल होता है. तब मरीज़ ने अपनी हालत से समझोता करके जीने का सोच लिया और २ ही मैंने बाद मरीज़ ने अपना काम करना शुरू कर दिया. हालांकि आँख की समस्या बनी रही. मरीज़ 3 साल तक ठीक रहा सब कुछ ठीक चल रहा था पर मरीज़ कमज़ोरी महसूस करता था. साल 2011 के सर्दियों के ही दिनों में मरीज़ के हाथ पैरो ने कम्पन होना और कोई भी काम करने पर हाथ पैर कापने की समस्या होना शुरू हो गया, परिवार के सदस्यों को लगा की यह सर्दी के कारण हो रहा है इस लिए उन्होंने ज़यादा ध्यान नहीं दिया. साल के आखिरी दिनों में अचानक ही मरीज़ चलते चलते गिर गया और स्वयं उठ नहीं पा रहा था तब घर में उपस्थित सदस्य तुरंत मरीज़ को अस्पताल लेकर पहुचे. तब डाक्टरों ने MRI की जिसमे पता चला की मरीज़ को मल्टीप्ल स्क्लेरोसिस (एम. अस) की समस्या हो गई है. दवाई चलती रही और जनवरी तक मरीज़ थोड़ा ठीक हो गया यह सब ऐसे ही चल रहा था की २०१४ के सर्दियों के शुरूआती दिनों में मरीज़ को लिखने खाना खाने जैसे कामो में भी हाथ कापने की समस्या होने लगी खुद चल भी नहीं पा रहे थे और बोलने में भी फर्क आ गया तो तुरंत ही अस्पताल में दिखाया इलाज़ चलता रहा आराम नहीं लगा तब जे के अस्पताल में कुछ दिन पहले भर्ती किया है यह इलाज़ अभी चल रहा है. यह समस्या के बाद से काम करना छूट गया तब परिवार को पालन पोषण की जिम्मेदारी मेरी पत्नी ने ले ली जीवनयापन के लिए एक छोटी सी दुकान शुरू की है जनरल स्टोर की मरीज़ का एक लड़का है ११ साल का उसको स्टडी करवा पाना भी काफी मुश्किल हो गया है. मरीज़ आज भी अपनी जॉब करना चाहता है इसलिए नहीं की ज़रूरत है बल्कि इसलिए क्यूंकि अपने काम को करना इन्हे पसंद है.

मरीज़ के रोग से सम्बंधित जानकारी इस लिंक पर मौजूद है. देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें :

A 44 year old man with left eye visual loss since 2006 and quadriparesis and urinary hesitancy since 4 years 


Saturday, 24 January 2015

 हेलो दोस्तों में इस ब्लॉग में आपके साथ एक मरीज़ की कहानी को साँझा कर रहा हूँ. जिसमे मरीज़ की समस्याओं को और उसकी पीडा को अनुभव किया जा सकता है साथ ही मरीज़ के लिए कुछ सम्भावित उपाय खोजे जा सकते हैं.

मरीज़ की कहानी स्वयं उसकी के अनुसार :

 

समस्या : पेट में सूजन की समस्या
महीनो से है.

मरीज़ के अनुसार :-  में ६० वर्षीय ग्रहणी महिला हूँ. मुझे लम्बे समय से कई प्रकार की समस्याएं हो रही है.  मेरा बचपन बहुत अच्छा नहीं था. घर की आर्थिक स्थिति भी बहुत ख़राब थी. इस कारण पढ़ाई लिखाई नही हो पाई थी. मेरी शादी भी ११ साल की उम्र में हो गई थी. मेरे पति की उम्र भी लगभग १४ साल रही होगी. शादी के साल बाद मेरा गौना हुआ था. मेरी शादी के करीब चार माह बाद ही मेरे पिता जी का देहांत हो गया था. कैसे हुआ ये याद नही है. १८ या १९ साल की उम्र रही होगी मेरी जब मुझे पहली संतान हुई थी. शादी के पहले से ही मुझे काम सुनाई देता था. मेरी पहली संतान एक साल ही जीवित रही थी. उस समय में अपने मायके में थी तब मेरी पहली लड़की की तबियत अचानक ख़राब हो गई थी सर्दियों के दिन थे. ठण्ड लगकर बुखार आया था उसको और अस्पताल में भर्ती रही चार दिन बाद वो मर गई. 2.5 साल बाद फिर एक लड़का हुआ वो जीवित है. उसके बाद साल बाद एक लड़का और हुआ पर वो दो साल ही जीवित रह सका था उसको सुखा रोग हो गया था. सामान्य बोल चाल में कहें तो कुपोषण का शिकार हो गया था. फिर साल बाद एक लड़का और हुआ जो जीवित है. इस बच्चे के समय मेरी उम्र करीब २४ साल रही होगी. जब गर्भ में थी उस समय मुझे हाथ पैरो में सुन्नपन की समस्या रहती थी इस समस्या के कारण कई बार अस्पताल में भर्ती होने पड़ा था. लड़का होने के बाद यही समस्या रहती थी.
इस बच्चे के होने के बाद करीब 1.5 साल बाद सर्दियों के दिनों में सर दर्द की समस्या रहती थी. फिर गर्मियों के दिनों में पहली बार नाक से खून आने की समस्या होने लगी थी. इसका घरेलु उपचार भी किया पर कोई स्थाई समाधान नही मिला था. जब खून आता था तब मुझे लेटा कर सर पे ठंडा पानी डालते थे और गोबर का ओपला गीला करके सुंघाते थे जिससे भी कोई आराम नही मिलता था. तब मुझे पास ही के अस्पताल में दिखाया वहां से मुझे कुछ दवाइयाँ दी गई पर आराम नही लगा था. कुछ ही दिनों बाद में नाक के पास के हिस्से में बहुत सूजन गई थी. जब सूजन बहुत ज़्यादा हो गई तब पुनः अस्पताल में दिखने ले कर गए थे. वहां से कोई समाधान नही मिला केवल कुछ ग्लूकोस की बोतल लगा दी गई थी और नाक की जांच की गई थी मगर ये समस्या क्यों हो रही है इसके सम्बन्ध में किसी डाक्टर ने नही बताया था. फिर देसी इलाज़ भी करवाया सूजन काम नही हो रही थी. कुछ दिनों बाद जगह वाली जगह पर घाव हो गया था. कुछ ही दिनों बाद घाव वाली जगह पर इल्लियाँ हो गई थी. मलतब कीड़े पड़ गए थे. पुनः अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टरों ने नाक की सफाई कर दी थी और नाक के छेद से खून आ रहा था उसको रोकने के लिए रुई से छेद बंद कर दिया था. एक या दो दिन बाद सूजन और भी ज़्यादा दिखने लगी थी तो डॉक्टरों ने नाक के छेद से रुई निकाल दी थी. समस्या में आराम नहीं होने पर मैंने इलाज करना छोड़ दिया था. तब कुछ महीनो बाद समस्या जब ज़्यादा हो गई तब फिर से अस्पताल में जाकर दिखाया था. उन्होंने कीड़े खत्म करने के लिए कुछ दवाइयाँ लिख दी थीं. धीरे धीरे कीड़े के साथ साथ ही सूजन भी ख़त्म होने लगी थी. जब सुझान समाप्त हुई तब हमने देखा की नाक का उठा हुआ स्थान पिचका हुआ नज़र आ रहा था. और साथ ही छेद भी नज़र आ रहा था कुछ दिनों बाद छेद पूरी तरह दिखना समाप्त हो गया था. और नाक वाला भाग पिचका हुआ दिखाई देने लगा था. इन समस्या के होने के बार करीब दो साल बाद हाथ और पैरो की उँगलियाँ टेडी होने लगी कुछ समय बाद उँगलियों में लालपन आने लगा था. परेशान आ कर स्वयं ही उलटे पैर का अंगूठा सरौते से काट लिया था. क्यूंकि वो अंगूठा सिमट कर छोटा होने लगा था. उसके बाद हाथो की उँगलियाँ भी स्वयं ही टेडी होने लगी थी. और फिर छोटी होने लगी थी. कुछ तो स्वतः ही पूरी तरह समाप्त हो गई थीं. इसका इलाज जिला अस्पताल में चला था. एक साल तक दवाई चली थी जिससे रोग बढ़ना रुक गया था. पर समाप्त नही हो रहा था. लोगो का कहना था की ये कुष्ठ रोग है. इन सब समस्या के साथ साथ करीब चालीस की उम्र तक पहुंच गई फिर मैंने इन सब समस्या को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना लिया था. उसके बाद मुझे ५९ साल की उम्र तक और कोई समस्या नही हुई फिर करीब ६ महीने पहले सर्दी लगकर बुखार आ गया शरीर में काफी जकरण और दर्द भी रहने लगा था साथ ही पुरे समय शरीर बहुत गर्म रहता था.
इसका इलाज़ हमने नही करवाया बस झाड़ा फुकी में लग गए वह उझाने बताया की मुझे निमोनिया की समस्या है उसने कुछ परहेज बताये और फिर मैंने किये भी पर आराम नही लगा. कुछ दिनों बाद पेट में सूजन की समस्या होना शुरू हो गई साथ ही दर्द भी रहने लगा इसका उपचार फिर सागर जिला अस्पताल में करवाया पर वहां से भी आराम नही लगा फिर हम भोपाल आ गए भोपाल के जे के अस्पताल में भर्ती हुए है यह मेरे पेट से पानी भी निकला गया है और अन्य प्रकार की जांच हो रही है अभी समस्या में सुधार नही है परन्तु आशा है की सब अच्छा होगा। मेरे भाई को भी कुष्ठ रोग की समस्या थी. मुझे इसके अलावा कोई समस्या नही है.
 
मरीज़ के रोग से सम्बंधित जानकारी इस लिंक पर मौजूद है. देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें : A 60 year old woman all problem's list here