हेलो दोस्तों में इस ब्लॉग में आपके साथ एक मरीज़ की कहानी को साँझा कर रहा हूँ. जिसमे मरीज़ की समस्याओं को और उसकी पीडा को अनुभव किया जा सकता है साथ ही मरीज़ के लिए कुछ सम्भावित उपाय खोजे जा सकते हैं.
मरीज़ की कहानी स्वयं उसकी के अनुसार :
समस्या: ठीक तरह से ना चल पाना एवं उल्टी आँख से ना देख पाना X 3 सालों से यह समस्या है.
मरीज के अनुसार : मरीज एक इंजीनियर
है. मरीज
का बचपन बहुत अच्छा था. मरीज के ६ भाई थे. स्कूल समय भी अच्छा बिता हालंकि ये एक एवरेज
स्टूडेंट थे पर कॉलेज में काफी होशियार स्टूडेंट में शामिल रहे थे दोस्ती यारी मज़ाक
साथ ही स्टडी भी करते थे. घर में चौथे नम्बर के लड़के होने के कारण किसी तरह की समस्या
का सामना नहीं करना पड़ा था. कॉलेज पूरा करने के बाद इनकी जॉब साल 1990 में मोटर साइकिल
के शो रूम में लग गई एक छोटी सी पोस्ट से अपने जॉब की शुरुआत की पर काम में अपना 100%
देने और दिलो-जान लगाकर काम करने का फल भी इन्हे मिला और अपने 16 साल के जॉब के सफर
में 4 प्रमोशन हासिल किये. और बाइक पार्ट्स बनाने वाले डिपार्टमेंट में ऊँची पोस्ट
पर रहे थे. इसी बीच इनकी शादी हो गई शादी के बाद अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए अपने
संयुक्त परिवार से अलग हो गए और अपनी पहचान बनाने में जूट गए इसके लिए इन्होने पूरी
दिल से अपनी जॉब को किया पर साल 2006 में ना चाहते हुए भी अपनी जॉब को छोड़ना पड़ा था.
ये साल इनके लिए काफी तकलीफ लेकर आया था.
आज से 8 साल पहले वर्ष 2006 में सर्दियों की एक रात जब मरीज़ अपने वाहन से घूमने जा रहा था तब करीब रात के ९ बजे का समय रहा होगा जब अचानक से इनके सामने एक मोटर साइकल आ गई और यह अपना संतुलन नही संभल पाए और एक घम्भीर एक्ससीडेंट के शिकार हो गए. टक्कर इतनी भयानक थी की मौके पर ही मरीज़ बेहोश हो गया और उसके उलटी आँख के पास और सर पर चोट लग गई जिससे रक्त निकलने लगा. परन्तु इनकी पत्नी को किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई थी. मरीज़ की पत्नी ने जब मरीज़ को ऐसी हालत में देखा तो रोते हुए सड़क पर जा रहे लोगो से मदद मांगने लगी. काफी प्रयास के बाद २ युवकों ने उनकी मदद की और मरीज़ को अस्पताल तक पहुँचाया.
जिस मोटर साइकल से इनकी टक्कर हुई थी वो तुरत ही स्पॉट से भाग गया था. मरीज़ को बेहोशी
की हालत में ही अस्पताल लाया गया था तब डाक्टरों ने हालत गंभीर देख कर मरीज़ को ICU
में भर्ती कर लिया और तुरंत ही घाव वाले स्थान पर टांके लगाये उसी समय मरीज़ को 2 से
3 बार उल्टियाँ भी हुई उल्टियों में पानी पानी सा था साथ ही लाल लाल रंग की थी. उल्टियों
के समय भी मरीज़ बेहोशी में था. कुछ ही समय बाद मरीज़ को फेड्स आने लगे तब डाक्टरों ने
कुछ इंजेक्शन और दवाई दी जिससे थोड़ा आराम हुआ, आराम मिलते ही मरीज़ को MRI की जांच के
लिए भेज दिया गया. मरीज़ को अगले दिन सुबह होश आया था. एम आर आई की रिपोर्ट सुबह मिली
तब डॉक्टर ने रिपोर्ट देख कर बताया की मरीज़ की ऑप्टिकल नर्व में समस्या हो गई है. साथ
ही मरीज़ को उल्टी आँख से कुछ नहीं दिखाई दे रहा था तो यह समस्या का कारण भी डाक्टरों
ने ऑप्टिकल नर्व में हुई डेमेज ही बताया था. साथ ही मरीज़ को होश आने के साथ ही नाक
से पानी बहाने की समस्या दिखाई देने लगी तब डाक्टरों ने बताया की मरीज़ के दिमाग में
भी चोट आई है इसी वजह से ये समस्या भी हो रही है इस समस्या के लिए डाक्टरों ने 14 दिनों
की दवाई लिख दी और डिस्चार्ज कर दिया. 13 दिनों में मरीज़ को नाक से पानी बहाने वाली
समस्या में आराम लग गया पर उल्टी आँख से ना दिख पाने वाली समस्या के लिए कई डाक्टरों
को दिखाया पर आराम नही मिला. आज भी आँख वाली समस्या पहले जैसी ही है आँख से ना के बराबर
दिखाई देता है. सभी डाक्टरों ने कहा की ऑप्टिकल नर्व में चोट लगने पर सुधार होना बहुत
मुश्किल होता है. तब मरीज़ ने अपनी हालत से समझोता करके जीने का सोच लिया और २ ही मैंने
बाद मरीज़ ने अपना काम करना शुरू कर दिया. हालांकि आँख की समस्या बनी रही. मरीज़ 3 साल
तक ठीक रहा सब कुछ ठीक चल रहा था पर मरीज़ कमज़ोरी महसूस करता था. साल 2011 के सर्दियों
के ही दिनों में मरीज़ के हाथ पैरो ने कम्पन होना और कोई भी काम करने पर हाथ पैर कापने
की समस्या होना शुरू हो गया, परिवार के सदस्यों को लगा की यह सर्दी के कारण हो रहा
है इस लिए उन्होंने ज़यादा ध्यान नहीं दिया. साल के आखिरी दिनों में अचानक ही मरीज़ चलते
चलते गिर गया और स्वयं उठ नहीं पा रहा था तब घर में उपस्थित सदस्य तुरंत मरीज़ को अस्पताल
लेकर पहुचे. तब डाक्टरों ने MRI की जिसमे पता चला की मरीज़ को मल्टीप्ल स्क्लेरोसिस
(एम. अस) की समस्या हो गई है. दवाई चलती रही और जनवरी तक मरीज़ थोड़ा ठीक हो गया यह सब
ऐसे ही चल रहा था की २०१४ के सर्दियों के शुरूआती दिनों में मरीज़ को लिखने खाना खाने
जैसे कामो में भी हाथ कापने की समस्या होने लगी खुद चल भी नहीं पा रहे थे और बोलने
में भी फर्क आ गया तो तुरंत ही अस्पताल में दिखाया इलाज़ चलता रहा आराम नहीं लगा तब
जे के अस्पताल में कुछ दिन पहले भर्ती किया है यह इलाज़ अभी चल रहा है. यह समस्या के
बाद से काम करना छूट गया तब परिवार को पालन पोषण की जिम्मेदारी मेरी पत्नी ने ले ली
जीवनयापन के लिए एक छोटी सी दुकान शुरू की है जनरल स्टोर की मरीज़ का एक लड़का है ११
साल का उसको स्टडी करवा पाना भी काफी मुश्किल हो गया है. मरीज़ आज भी अपनी जॉब करना
चाहता है इसलिए नहीं की ज़रूरत है बल्कि इसलिए क्यूंकि अपने काम को करना इन्हे पसंद
है.

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