Saturday, 24 January 2015

 हेलो दोस्तों में इस ब्लॉग में आपके साथ एक मरीज़ की कहानी को साँझा कर रहा हूँ. जिसमे मरीज़ की समस्याओं को और उसकी पीडा को अनुभव किया जा सकता है साथ ही मरीज़ के लिए कुछ सम्भावित उपाय खोजे जा सकते हैं.

मरीज़ की कहानी स्वयं उसकी के अनुसार :

 

समस्या : पेट में सूजन की समस्या
महीनो से है.

मरीज़ के अनुसार :-  में ६० वर्षीय ग्रहणी महिला हूँ. मुझे लम्बे समय से कई प्रकार की समस्याएं हो रही है.  मेरा बचपन बहुत अच्छा नहीं था. घर की आर्थिक स्थिति भी बहुत ख़राब थी. इस कारण पढ़ाई लिखाई नही हो पाई थी. मेरी शादी भी ११ साल की उम्र में हो गई थी. मेरे पति की उम्र भी लगभग १४ साल रही होगी. शादी के साल बाद मेरा गौना हुआ था. मेरी शादी के करीब चार माह बाद ही मेरे पिता जी का देहांत हो गया था. कैसे हुआ ये याद नही है. १८ या १९ साल की उम्र रही होगी मेरी जब मुझे पहली संतान हुई थी. शादी के पहले से ही मुझे काम सुनाई देता था. मेरी पहली संतान एक साल ही जीवित रही थी. उस समय में अपने मायके में थी तब मेरी पहली लड़की की तबियत अचानक ख़राब हो गई थी सर्दियों के दिन थे. ठण्ड लगकर बुखार आया था उसको और अस्पताल में भर्ती रही चार दिन बाद वो मर गई. 2.5 साल बाद फिर एक लड़का हुआ वो जीवित है. उसके बाद साल बाद एक लड़का और हुआ पर वो दो साल ही जीवित रह सका था उसको सुखा रोग हो गया था. सामान्य बोल चाल में कहें तो कुपोषण का शिकार हो गया था. फिर साल बाद एक लड़का और हुआ जो जीवित है. इस बच्चे के समय मेरी उम्र करीब २४ साल रही होगी. जब गर्भ में थी उस समय मुझे हाथ पैरो में सुन्नपन की समस्या रहती थी इस समस्या के कारण कई बार अस्पताल में भर्ती होने पड़ा था. लड़का होने के बाद यही समस्या रहती थी.
इस बच्चे के होने के बाद करीब 1.5 साल बाद सर्दियों के दिनों में सर दर्द की समस्या रहती थी. फिर गर्मियों के दिनों में पहली बार नाक से खून आने की समस्या होने लगी थी. इसका घरेलु उपचार भी किया पर कोई स्थाई समाधान नही मिला था. जब खून आता था तब मुझे लेटा कर सर पे ठंडा पानी डालते थे और गोबर का ओपला गीला करके सुंघाते थे जिससे भी कोई आराम नही मिलता था. तब मुझे पास ही के अस्पताल में दिखाया वहां से मुझे कुछ दवाइयाँ दी गई पर आराम नही लगा था. कुछ ही दिनों बाद में नाक के पास के हिस्से में बहुत सूजन गई थी. जब सूजन बहुत ज़्यादा हो गई तब पुनः अस्पताल में दिखने ले कर गए थे. वहां से कोई समाधान नही मिला केवल कुछ ग्लूकोस की बोतल लगा दी गई थी और नाक की जांच की गई थी मगर ये समस्या क्यों हो रही है इसके सम्बन्ध में किसी डाक्टर ने नही बताया था. फिर देसी इलाज़ भी करवाया सूजन काम नही हो रही थी. कुछ दिनों बाद जगह वाली जगह पर घाव हो गया था. कुछ ही दिनों बाद घाव वाली जगह पर इल्लियाँ हो गई थी. मलतब कीड़े पड़ गए थे. पुनः अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टरों ने नाक की सफाई कर दी थी और नाक के छेद से खून आ रहा था उसको रोकने के लिए रुई से छेद बंद कर दिया था. एक या दो दिन बाद सूजन और भी ज़्यादा दिखने लगी थी तो डॉक्टरों ने नाक के छेद से रुई निकाल दी थी. समस्या में आराम नहीं होने पर मैंने इलाज करना छोड़ दिया था. तब कुछ महीनो बाद समस्या जब ज़्यादा हो गई तब फिर से अस्पताल में जाकर दिखाया था. उन्होंने कीड़े खत्म करने के लिए कुछ दवाइयाँ लिख दी थीं. धीरे धीरे कीड़े के साथ साथ ही सूजन भी ख़त्म होने लगी थी. जब सुझान समाप्त हुई तब हमने देखा की नाक का उठा हुआ स्थान पिचका हुआ नज़र आ रहा था. और साथ ही छेद भी नज़र आ रहा था कुछ दिनों बाद छेद पूरी तरह दिखना समाप्त हो गया था. और नाक वाला भाग पिचका हुआ दिखाई देने लगा था. इन समस्या के होने के बार करीब दो साल बाद हाथ और पैरो की उँगलियाँ टेडी होने लगी कुछ समय बाद उँगलियों में लालपन आने लगा था. परेशान आ कर स्वयं ही उलटे पैर का अंगूठा सरौते से काट लिया था. क्यूंकि वो अंगूठा सिमट कर छोटा होने लगा था. उसके बाद हाथो की उँगलियाँ भी स्वयं ही टेडी होने लगी थी. और फिर छोटी होने लगी थी. कुछ तो स्वतः ही पूरी तरह समाप्त हो गई थीं. इसका इलाज जिला अस्पताल में चला था. एक साल तक दवाई चली थी जिससे रोग बढ़ना रुक गया था. पर समाप्त नही हो रहा था. लोगो का कहना था की ये कुष्ठ रोग है. इन सब समस्या के साथ साथ करीब चालीस की उम्र तक पहुंच गई फिर मैंने इन सब समस्या को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना लिया था. उसके बाद मुझे ५९ साल की उम्र तक और कोई समस्या नही हुई फिर करीब ६ महीने पहले सर्दी लगकर बुखार आ गया शरीर में काफी जकरण और दर्द भी रहने लगा था साथ ही पुरे समय शरीर बहुत गर्म रहता था.
इसका इलाज़ हमने नही करवाया बस झाड़ा फुकी में लग गए वह उझाने बताया की मुझे निमोनिया की समस्या है उसने कुछ परहेज बताये और फिर मैंने किये भी पर आराम नही लगा. कुछ दिनों बाद पेट में सूजन की समस्या होना शुरू हो गई साथ ही दर्द भी रहने लगा इसका उपचार फिर सागर जिला अस्पताल में करवाया पर वहां से भी आराम नही लगा फिर हम भोपाल आ गए भोपाल के जे के अस्पताल में भर्ती हुए है यह मेरे पेट से पानी भी निकला गया है और अन्य प्रकार की जांच हो रही है अभी समस्या में सुधार नही है परन्तु आशा है की सब अच्छा होगा। मेरे भाई को भी कुष्ठ रोग की समस्या थी. मुझे इसके अलावा कोई समस्या नही है.
 
मरीज़ के रोग से सम्बंधित जानकारी इस लिंक पर मौजूद है. देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें : A 60 year old woman all problem's list here

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